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मजदूर

मजदूर (सायली छन्द) मजदूर श्रम करे भूखे पेट रह सबका पेट भरता लोहा पिघला देता अपना खून पसीना एक कर मजदूर कर्जा कर लेता चुका नहीं पाता श्रम करता भूखा थकता कभी नहीं श्रम करता रहता रात दिन मजदूर इच्छा कुछ नहीं मेहनत करता जाता तन नंगा मजदूर         ©डॉ एन के सेठी बड़ियाल कलाँ,बाँदीकुई(दौसा)राज.