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धरा…बचाइए

धरा…बचाइए

धरती

धरती(दोहे) 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 धरती  सबको पालती, ये  सबकी  है  मात। औषध उपजाती सदा,स्वस्थ करे हर गात।। हम सबकी जननी धरा , इसकी हम संतान। सबका सहती भार भू,  करें  सभी सम्मान।। क्षमा दया सब धारती, सबका रखती ध्यान। अचला  वसुधा  भू मही, धरा धरित्री जान।। शस्य श्यामला यह धरा, जगती का है प्राण। रखें प्रदूषण मुक्त हम,  होगा जग कल्याण।। भरती   रहती   ये सदा, अन्न   वित्त  भंडार। लेती  यह  कुछ भी नही, देती  है हर  बार।। 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳         ©डॉ एन के सेठी