संदेश

यही सत्य परमार्थ

धरना करना छोड़ कर,सभी करें पुरुषार्थ। जीवन उन्नत हो सदा,यही सत्य परमार्थ।।1।। आज प्रदर्शन हो रहे, दुनिया में चहुँ ओर। आम आदमी त्रस्त है,  महँगाई  का जोर।।2।। भौतिकता  की दौड़ में, टूट  गए  परिवार। आज सभी भटके युवा,भूल गए संस्कार।।3।। आंदोलन के जोर से, आता है बदलाव। उचित नहीं है राह ये, होता है विलगाव।।4।। एक गलत अफवाह से,बिगड़े सारे काम। बन जाता वह हादसा,मिले बुरे परिणाम।।5।।                    ✍️ डॉ नवल किशोर सेठी

सुन्दरी नार

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सुन्दरी नार कंगन   हाथों  में   सजे,  लगे  सुन्दरी  नार। चमक रही नवयौवना,खुश करती भरतार।।१।। पायल पहने कामिनी,छन छन करती चाल। हिय  में  उठती  हूक सी, हाल करे बेहाल।।२।। बिंदिया  सजती  भाल  पे,भरे  माँग  सिंदूर। करती  सभी सुहागिनें, अलंकरण भरपूर।।३।। काजल  आँखों  में  लगा, करे  नैन कजरार। मृगनयनी  बनके  करे,आकर्षित हर नार।।४।। बिंदी   पायल   कंगना,  कर  सोलह  श्रृंगार। करती हैं खुश कांत को,सभी सुहागिन नार।।५।।                                     © डॉ एन के सेठी

सावन

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सावन सावन मास बड़ा मनभावन,बारिश ने अति धूम मचाई। ताल तडाग भरे जल से सब,मौसम ने अब ली अँगड़ाई।। बादल गर्जन घोर करे अब, कामिनियाँ सब  हैं शरमाई। हर्षित मोर चकोर सभी जन,ये ऋतु जीवन में अब छाई ।।                                   © डॉ एन के सेठी

संतोष

संतोष (दोहे) जिनके मन संतोष है, मनुज वही खुशहाल। लालच है सबसे बुरा,  रूप बड़ा विकराल।। माया  के   जंजाल  से,    रहें  सदा  ही  दूर। संतोषी  रहकर  सदा,  पाएं   सुख  भरपूर।। नाशवान  है  ये  जगत, करो न मन आसक्त। रहें  सदा  संतोष  से,   शांत  रहें  हर  वक्त।। लालच दुख का मूल है, कर दें इसका त्याग। संतोषी  रहता सुखी, बुझे  लोभ की  आग।। भौतिक सुख की लालसा,मन को करेअशुद्ध। रखता  जो  संतोष  धन,  होता  वही  प्रबुद्ध।।                          © डॉ एन के सेठी

शीत

शीत (मनहरण घनाक्षरी) ठंडे दिन अरु रात,थर थर काँपे गात,आई है ये शीत ऋतु,सेहत बनाइए।। मंद हैं रवि के ताव, लगे जलने अलाव,कोहरा भी छाने लगा,योग आजमाइए।। शीतल समीर बहे,सभी तन ढके रहे,खाओ पीओ खूब सब,आनंद मनाइए।। रेवड़ी गजक स्वाद, मूँगफली गुड याद,खाओ इन्हें सभी जन,स्वस्थ तन पाइए।।                               ©डॉ एन के सेठी

यही हिंद की शान

यही हिंद की शान

विवाह

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