शीत
शीत
(मनहरण घनाक्षरी)
ठंडे दिन अरु रात,थर थर काँपे गात,आई है ये शीत ऋतु,सेहत बनाइए।।
मंद हैं रवि के ताव, लगे जलने अलाव,कोहरा भी छाने लगा,योग आजमाइए।।
शीतल समीर बहे,सभी तन ढके रहे,खाओ पीओ खूब सब,आनंद मनाइए।।
रेवड़ी गजक स्वाद, मूँगफली गुड याद,खाओ इन्हें सभी जन,स्वस्थ तन पाइए।।
©डॉ एन के सेठी
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