कविता
*उठो देश के वीर जवानों*
🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹
उठो देश के वीर जवानों
ड्रेगन का संहार करो।
धोखेबाजी करता है जो
वैसा ही व्यवहार करो।।
बहुत सह लियाअबतक हमने
अबउसका प्रतिकार करो।
बनो आत्मनिर्भर स्वयं अब
चीन का बहिष्कार करो।।
हिंदी चीनी भाई भाई
यह नारा तो धोखा है।
कायरता की हदें लांघ दी
छुरा पीठ में घोंपा है।।
बहुत हो गई बातें अब तक
अब बातों का काम नहीं।
देंगे अब मुंहतोड़ जवाब
बासठ का ये हिंन्द नही।।
आत्मशक्ति के बल पर हमने
दिल से दिल को जोड़ा है।
लेकिन ड्रैगन की चालों ने
दिल हम सबका तोड़ा है।।
पहले तो हम ना छेड़ेंगे
छेड़ा तो ना छोड़ेंगे।
हद को पार किया हैअब तो
अब हम उसको तोड़ेंगे।।
वीर शहीदों की शहादतें
व्यर्थ नही जाने देंगें।
दुश्मन की नापाक चाल को
सफल नही होने देंगे।।
ललकारा यदि दुश्मन ने तो
पीछे हम नही हटेंगे।
इक के बदले दस दस सैनिक
उनके मार गिरा देंगे।।
हम भारत माँ के बेटे है
पीठ न कभी दिखाएंगे।
शीश कटा देंगें अपना पर
शीश न कभी झुकाएंगे।।
मातृभूमि का कोई हिस्सा
अलग नही होने देंगे।।
दुश्मन हो कितना ताकतवर
उसको धूल चटा देंगें।।
समय नही अब सोने का है
रणचंडी आह्वान करो।
उठो देश के वीर जवानो
ड्रैगन का संहार करो।।
🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹
©डॉ एन के सेठी
Nice
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएं