कोरोना
विषय-कोरोना
विधा-दोहा
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कोरोना ने ही किया, इस जग को बेहाल।
हर इक जनभयभीत है,रूप हुआ विकराल।।
विद्यालय सूने हुए, बच्चे घर में कैद।
कोरोना के कारणे, सभी हुए मुस्तैद।।
सूनापन अब छा रहा,सड़कें गलियाँ द्वार।
बिन बच्चे उद्यान भी, सूने अरु बेज़ार।।
होते शिक्षण केन्द्र भी, बच्चों से गुलजार।
अब कोरोना काल में, सभी हुए बेकार।।
अब जीना होगा हमे, कोरोना के साथ।
करें नियम की पालना,रख ईश्वर को माथ।।
हाथों को धोतें रहें, दिन में बारम्बार।
मुँह पर मास्क लगाय के,दो गज करें विचार।।
कोरोना हारे तभी, हम हों दृढ़संकल्प।
करें योग हम नित्य सब,इसका नही विकल्प।।
कोरोना के सामने, सब है एक समान।
कोरोना देखे नही, निर्धन या धनवान।।
इस कोरोना काल ने, सिखा दिया है ज्ञान।
अपनाओ अध्यात्म को,करो ईश का ध्यान।।
दृढ़ता से कर सामना, होय नही भयभीत।
कोरोना भी जायगा , होगी अपनी जीत।।
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©डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)राज.
Nice
जवाब देंहटाएंNice sir
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंNice
जवाब देंहटाएंThanks
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