पर्यावरण
विषय-प्यास
विधा-मनहरण घनाक्षरी
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
पानी की मची है त्राहि
पृथ्वी भी है गरमाई
प्यास से मरेंगे सब
पानी न बचाएंगे।।
मिट गई हरीयाली
जंगल हो गए खाली
वन्य प्राणी भी हैं प्यासे
जंगल बचाएंगे।।
प्रदूषण कम करे
जीवन में श्रम करे
पर्यावरण के लिए
वृक्षों को लगाएंगे।।
जल पवन शुद्ध हो
न धरा ताप वृद्ध हो
प्यास बुझाने के लिए
जल भी बचाएंगे।।
प्रकृति का ये कहर
बन जायेगा जहर
अब भी समझ जाओ
सब पछताएंगे।।
मिलके लगाओ वृक्ष
जल को बनाओ स्वच्छ
बून्द बून्द अमृत है
प्यास तो बुझाएंगे।।
पर्यावरण बचाओ
प्रदूषण को हटाओ
शुद्ध जल वायु होगी
जीवन बचाएंगे।।
जल जीवन आधार
वायु प्राणों का संचार
वृक्ष लगा कर हम
धरा को बचाएंगे।।
🎄🦚🌴🦜🌱☘🍀
©डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें