आओ चलो बच्चा बन जाएं
🌹आज चलो बच्चा बन जाएं🌹
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बचपन की वो हँसी ठिठोली
मीठी और तुतलाती बोली
परम्परागत खेल निराले
हँसीखुशी मिलकर के खेलें
फिर से वो ही पल दोहराए
आज चलो बच्चा बन जाएं।।
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चिंता फिक्र नही थी कोई
केवल खाना खेलना होई
कभी रूठना कभी मनाना
नाही कोई पराया अपना
स्मृति में हम फिर खो जाए
आज चलो बच्चा बन जाएं।।
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बात बात पर रोज झगड़ना
फिर से वही सुलह कर लेना
छल कपट का नाम नही था
धन दौलत से काम नही था
एक नया इतिहास रचाए
आज चलो बच्चा बन जाएं।।
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माँ की गोदी जन्नत लगती
दादी रोज कहानी कहती
नानी लोरी खूब सुनाती
बचपन की फिर याद है आती
बचपन शोषण मुक्त बनाये
आज चलो बच्चा बन जाएं।।
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काश हम बच्चे ही रह जाते
कभी बड़े ना हम बन पाते
कितना भोला और प्यारा था
बचपन का वो पल न्यारा था
आओ उसको फिर दोहराए
आज चलो बच्चा बन जाएं।।
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©डॉ एन के सेठी
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