इश्क
*इश्क का चाँद*
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इश्क का चाँद दिखा है आज।
तज दिए हमने भी सब काज।।
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इश्क चाँदनी सा चमक रहा।
दिल में रोशन हो दमक रहा।।
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महकता फिजां में खुशबू बन।
इश्क ही है बंदगी का फन।।
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चाँद करता है रोशन जहां।
इश्क चाँद सा चमकता वहाँ।।
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इश्क इबादत, इश्क नशा है।
इश्क जुनून,इक कहकशां है।।
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इश्क दूज चौदवी का चाँद ।
इश्क पूर्णिमा,ईद का चाँद।।
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बिन इश्क के जहां है सूना।
इश्क है सितारों को छूना।।
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इश्क ही आँखों केअश्क है।
इश्क है चाह, नही रश्क है।।
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चाँद का इश्क चाँदनी संग।
करता रोशन हर एक अंग।।
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चाँद फिर नजर में आया है।
मैंने इश्क का मन बनाया है।।
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©डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)राज.
गुड से मीठा इश्क
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंNice👌👌
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंVery nice
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