इश्क

*इश्क का चाँद*

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इश्क का चाँद दिखा है आज।
तज दिए हमने भी सब काज।।
           💡💡💡
इश्क चाँदनी सा चमक रहा।
दिल में रोशन हो दमक रहा।।
           💡💡💡
महकता फिजां में खुशबू बन।
इश्क  ही  है  बंदगी का फन।।
           💡💡💡
चाँद  करता है रोशन   जहां।
इश्क चाँद सा चमकता वहाँ।।
           💡💡💡
इश्क  इबादत, इश्क  नशा है।
इश्क जुनून,इक कहकशां है।।
           💡💡💡
इश्क दूज चौदवी का चाँद ।
इश्क पूर्णिमा,ईद का चाँद।।
           💡💡💡
बिन इश्क के जहां है सूना।
इश्क है सितारों  को छूना।।
           💡💡💡
इश्क ही आँखों केअश्क है।
इश्क है चाह, नही रश्क है।।
           💡💡💡
चाँद का इश्क चाँदनी संग।
करता रोशन हर एक अंग।।
          💡💡💡
चाँद फिर नजर में आया  है।
मैंने इश्क का मन बनाया है।।

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             ©डॉ एन के सेठी
            बाँदीकुई(दौसा)राज.

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